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CG — रेत खदानों की कार्रवाई पर भड़के ग्रामीण, बोले— “खनन से मिलता है रोजगार”, जनप्रतिनिधियों पर अपनी झोली भरने का लगाया आरोप, विधायक ने कहा “आखिर कौन यह हैं यह लोग,,? 

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कांकेर/चारामा, 26 मई 2026 :— कांकेर जिले की चारामा रेत खदान एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार कार्रवाई के लिए नहीं बल्कि क्षेत्र के ग्रामीण रेत खदानों पर सांसद-विधायक द्वारा की जा रही कार्रवाई पर नाराजगी जता रहे हैं।

बताया जा रहा है कि देर रात 10 ग्रामों के ग्रामीण चारामा के कोरर चौक में बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए। इस दौरान ग्रामीण भारी आक्रोश में नजर आए। उपस्थित ग्रामीणों ने क्षेत्रीय सांसद भोजराज नाग द्वारा की गई कार्रवाई को बेवजह बताया। ग्रामीणों ने कहा कि रेत खदान से गांवों में कई विकास कार्य हुए हैं। गांव के युवाओं को इससे रोजगार मिल रहा है, लेकिन खदान बंद होने से उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सांसद कभी उनके गांव नहीं आए। कई बार कार्यक्रमों में बुलाने के बावजूद भी नहीं पहुंचे, लेकिन जब खदान की बात आती है तो गांव के किसी व्यक्ति से बिना पूछे सीधे खदान में पहुंचकर कार्रवाई करवा देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कभी गांव की समस्याएं नहीं सुनी गईं। रेत खदान के खनन से ग्रामीणों को कोई दिक्कत नहीं है, बल्कि कुछ चंद जनप्रतिनिधियों के कहने पर सांसद कार्रवाई पर उतर आए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के रवैये के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

वहीं ग्राम भिलाई के ग्राम प्रमुख गोपाल गजेंद्र ने बताया कि उनके गांव में संचालित रेत खदान पंचायत और गांव के विकास कार्यों के लिए चलाई जा रही है। गांव के लोग इसमें काम कर रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि गांव के विकास कार्यों की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रेत खदान से मिलने वाली राशि से तालाब निर्माण, देवगुड़ी निर्माण, शीतला मंदिर में कार्य तथा रंगमंच निर्माण जैसे कई विकास कार्य किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग के लोगों को अपनी भूमि और संसाधनों पर अधिकार है, जो पांचवीं अनुसूची के तहत मिला हुआ है। यदि सांसद या विधायक खनन पर रोक लगाते हैं तो यह गांव के विकास कार्यों पर रोक लगाने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि गांव की समस्याओं को सुनने के बजाय सिर्फ अपनी झोली भरने का काम कर रहे हैं। ग्रामीणों ने आग्रह किया कि खदानों को बंद न किया जाए, क्योंकि इससे गांवों में रोजगार और विकास दोनों प्रभावित हो रहे हैं। जनप्रतिनिधि हमारा रोजगार क्यों छीन रहे है। 

ग्राम करिहा के ग्राम प्रमुख मदन लाल जैन ने बताया कि ग्राम पंचायत और ग्रामीण मिलकर नियमों के तहत रेत खदान संचालित करवाते हैं। पंचायत और ग्राम सभा के प्रस्ताव के बाद खदान दी जाती है। इससे मिलने वाली राशि का उपयोग गांव के विकास और बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने में किया जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि अपनी झोली भरने के लिए खदानों में हस्तक्षेप कर उन्हें बंद करवाने का प्रयास करते हैं, जबकि गांव के कार्यक्रमों में बुलाने पर नहीं आते। उन्होंने कहा कि यदि किसी ग्रामीण को खनन से परेशानी है तो पहले ग्राम सभा में चर्चा होनी चाहिए। ग्रामीण चाहते हैं कि खदान पूरी तरह चालू रहे ताकि गांव के विकास कार्य जारी रह सकें।

मदन लाल जैन ने बताया कि ग्राम करिया में लगभग 20 लाख रुपये की लागत से भव्य शीतला मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है। यदि रेत खदान बंद हो गई तो मंदिर निर्माण अधूरा रह जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि खदानों को जल्द शुरू किया जाए ताकि गांवों का विकास कार्य प्रभावित न हो।

वहीं ग्राम पंचायत भर्रीटोला के आश्रित ग्राम मचान्दुर के ग्रामीण हेमू साहू ने कहा कि उनके गांव के कई युवक रेत खदान में रोजगार कर रहे हैं। सांसद द्वारा की गई कार्रवाई से ग्रामीण नाराज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद गांव के कार्यक्रमों में कभी शामिल नहीं हुए, लेकिन अचानक खदानों में पहुंचकर कार्रवाई करने लगे।

उन्होंने कहा कि रेत खनन से मिलने वाली राशि से गांव के छोटे-मोटे विकास कार्य हो रहे हैं। सांसद को पहले यह देखना चाहिए कि कहां अवैध काम हो रहा है और कहां वैध तरीके से खनन हो रहा है। आगे कहा कि वे भी भाजपा के कार्यकर्ता हैं, लेकिन सांसद ने कभी उनसे चर्चा नहीं की।

ग्राम हाराडुला के सरपंच पति टाकेश्वर मरकाम ने बताया कि उनके गांव की स्वीकृत रेत खदान से मिलने वाली राशि गांव के विकास में खर्च की जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार बने एक साल हो गया, लेकिन गांव में अब तक कोई बड़ा विकास कार्य नहीं हुआ। पंचायत में फंड की कमी है, इसलिए गांव के लोग रेत खदानों पर निर्भर हैं।

उन्होंने बताया कि गांव में जल संकट को दूर करने के लिए रेत खनन से प्राप्त राशि से नया बोर निर्माण कराया गया और सोलर लाइट लगाई गई। उन्होंने सांसद की कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कहा कि छोटे-छोटे खदानों में जाकर कार्रवाई करना उचित नहीं है। ग्रामीण चाहते हैं कि खदानें चालू रहें ताकि गांव का विकास प्रभावित न हो।

 

वहीं ग्राम मचान्दुर के निवासी कमलेश पिद्दा ने कहा कि उनका गांव बस्तर का मुख्य द्वार माना जाता है, लेकिन सांसद कभी गांव में नहीं रुके। उन्होंने कहा कि गांव के विकास कार्यों में रेत खदान से मिलने वाली राशि का उपयोग किया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई सिर्फ स्वार्थ के लिए की जा

रही है।

इस दौरान लगभग 10 से अधिक गांवों के ग्राम प्रमुख और ग्रामीण बड़ी संख्या में कोरर चौक में मौजूद रहे। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर आरोप लगाया कि वे अपनी झोली भरने के लिए रेत खदानों को बंद करवाना चाहते हैं, जबकि गांव की समस्याओं को सुनने कभी नहीं आते। ग्रामीणों का कहना है कि रेत खदानों से रोजगार के साथ-साथ गांवों का विकास भी हो रहा है।

इस पर सावित्री मंडावी ने कहा कि मैं रेत खदान को बंद नहीं करवा रही हूं। कल ब्लॉक सरपंच संघ ने जो आवेदन दिया है, उसमें अवैध रूप से लगे चैन माउंटेन पर कार्रवाई की मांग की गई है, न कि रेत खदान पर। रेत खदान की स्वीकृति शासन-प्रशासन देखता है।

कई ग्रामीण मुझे फोन के माध्यम से रेत खनन के कारण होने वाली परेशानियों की जानकारी देते रहते हैं। एक पुल टूट चुका है और अन्य पुलों में भी सरिए दिखाई देने लगे हैं। इस संबंध में लगातार शिकायतें आ रही हैं। चारामा नगरवासी भी लगातार शिकायत कर रहे हैं। नेशनल हाईवे में आने-जाने वालों को काफी परेशानी होती है, विशेषकर बाइक सवारों को। इसी कारण कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और कई लोगों की जान भी जा चुकी है। इतनी बड़ी-बड़ी हाइवा गाड़ियों के चलने से हादसे बढ़ रहे हैं।

हमारा विरोध चैन माउंटेन और हाइवा परिवहन को लेकर है। हम चाहते हैं कि संबंधित ग्राम के लोगों को रोजगार मिले और ट्रैक्टर के माध्यम से परिवहन किया जाए, ताकि स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिल सके। लगातार मेरे ऊपर भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि यह सब विधायक के कारण हो रहा है, जबकि यह गलत है। हम भी चाहते हैं कि लोगों को रोजगार मिले। हम सिर्फ चैन माउंटेन और हाइवा पर कार्रवाई की बात कर रहे हैं।

सरपंच संघ का आवेदन मेरे पास है, जिसमें उन्होंने खुद मांग की है कि चैन माउंटेन से खनन न हो और बड़े-बड़े हाइवा बंद किए जाएं। स्थानीय लोगों को रोजगार मिले। गांवों में अधिकतर लोगों के पास ट्रैक्टर हैं और ट्रैक्टर के माध्यम से परिवहन कर खनन कार्य किया जाए। ट्रैक्टर मालिक भी इस बात पर सहमत हो गए हैं।

जो लोग मीडिया के सामने बयान दे रहे हैं, वे आखिर हैं कौन? वहां गांव वाले तो दिखाई नहीं दे रहे हैं। मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि क्या वे यहां रोज हो रहे हादसों की जिम्मेदारी लेंगे? लोग परेशान हैं, पुल टूट रहे हैं, ग्रामीण भी परेशान हैं। अगर एक और पुल टूट गया तो लोगों का आना-जाना कैसे होगा? जो लोग बयान दे रहे हैं, क्या वे इसकी जिम्मेदारी लेंगे?

किसानों के मुद्दों पर ये लोग नजर नहीं आते। मैं यह कहना चाहती हूं कि जो लोग बयान दे रहे हैं, आखिर वे सरपंच हैं क्या? मैं गांव में जाकर सभी ग्रामीणों से चर्चा करूंगी कि वास्तव में रेत खनन से गांव का विकास हो रहा है या नहीं। साथ ही, जो लोग बिना तथ्य के बयान दे रहे हैं, उनसे कहूंगी कि इस प्रकार की हरकत न करें और सच्चाई के आधार पर ही बात करें।

चारामा की रेत खदानों को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के बीच विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। ग्रामीण जहां खदानों को रोजगार और विकास का जरिया बता रहे हैं, वहीं विधायक सावित्री मंडावी ने अवैध चैन माउंटेन और भारी हाइवा परिवहन को हादसों व परेशानियों की वजह बताया है।

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