वनरक्षक भर्ती में जान गंवाने वाले युवक के परिवार को अब तक नहीं मिला मुआवजा, डेढ़ साल से न्याय की आस में भटक रहे परिजन, कलेक्टर से लगाई गुहार।


कांकेर, 24 जून 2026:— वनरक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान मृत हुए अभ्यर्थी महेंद्र कुमार कोरेटी के परिजनों को मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि अब तक नहीं मिलने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। इस संबंध में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी एवं छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के पदाधिकारियों ने बुधवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा और शीघ्र मुआवजा राशि दिलाने की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया है कि ग्राम कोचवाही नरहरपुर निवासी महेंद्र कुमार कोरेटी उम्र 26 वर्ष की 9 दिसंबर 2024 को आयोजित वनरक्षक भर्ती परीक्षा की शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान अचानक मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा मृतक के आश्रित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई थी।
पार्टी के अनुसार, वन मंडलाधिकारी कांकेर द्वारा 7 जनवरी 2025 को आवश्यक दस्तावेज और मृतक की माता के बैंक खाते की जानकारी उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी है। इसके बावजूद आज तक पीड़ित परिवार को सहायता राशि नहीं मिल सकी है।
मृतक के भाई कृष्णा कोरेटी ने बताया कि वनरक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान उसके भाई की मौत हो गई थी और शासन-प्रशासन द्वारा मुआवजा देने की घोषणा की गई थी, लेकिन डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई सहायता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि परिवार कई बार कलेक्टर कार्यालय और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के पास गुहार लगा चुका है, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि परिवार लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहा है और न्याय की उम्मीद में दर-दर भटकने को मजबूर है।
वहीं, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी एवं छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश प्रभारी निखिलेश दीवान साहू ने मीडिया में कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक युवक की मौत होने के बाद मुख्यमंत्री ने 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक परिवार को राशि नहीं मिल पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद अब तक जिले का कोई जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवार से मिलने तक नहीं पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि परिवार लगातार जिले के बड़े अधिकारियों के पास आवेदन देकर सहायता की मांग कर रहा है। यहां तक कि सुशासन तिहार के दौरान भी कई बार आवेदन प्रस्तुत किए गए, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। निखिलेश दीवान ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया तो जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़ क्रांति सेना द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
ज्ञापन में मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 10 लाख रुपये की सहायता राशि सात कार्य दिवसों के भीतर परिजनों के खाते में हस्तांतरित करने तथा मामले में हुई देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।

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