CG : शहीद जवान को अंतिम विदाई देने उमड़ा लोगों का सैलाब,”संजय गढ़पाले अमर रहे ” से गूंजा कांकेर का हाराडुला गांव..


कांकेर,3 मई 2026। ग्राम हाराडुला का वह लाल आज भले ही खामोश हो गया हो, लेकिन उसकी कहानी, उसका साहस और उसका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के दिलों में हमेशा गूंजता रहेगा,ग्राम हाराडुला एक छोटा सा गांव, जहां की मिट्टी में सादगी है, संघर्ष है और सपनों की खुशबू है,इसी मिट्टी ने एक ऐसे सपूत को जन्म दिया,जिसने अपने छोटे-छोटे सपनों को देश सेवा के सबसे बड़े संकल्प में बदल दिया,शहीद जवान संजय गढ़पाले।
संजय बचपन से ही अलग थे,उनकी आंखों में सिर्फ सपने नहीं, बल्कि उन सपनों को पूरा करने की जिद भी थी, गांव की पगडंडियों पर चलते हुए, खेतों के बीच खेलते हुए, उन्होंने हमेशा एक ही बात सोची “कुछ ऐसा करना है जिससे परिवार का नाम रोशन हो, और देश के लिए कुछ कर सकूं।”
एक साधारण परिवार में जन्मे संजय के लिए यह रास्ता आसान नहीं था। उनके पिता, जो एक छोटी सी सायकल दुकान चलाकर घर का खर्च उठाते थे, हर दिन मेहनत करते थे ताकि उनके बच्चों का भविष्य बेहतर हो सके। उनकी मां, जो मितानिन के रूप में गांव के लोगों की सेवा करती थीं, अपने बेटे में हमेशा एक उज्ज्वल भविष्य देखती थीं। छोटा भाई भी उनके सपनों का साथी था, जो हर कदम पर उनके साथ खड़ा रहा,लेकिन इन सीमित संसाधनों के बावजूद, संजय के हौसले कभी छोटे नहीं पड़े। उन्होंने हर मुश्किल को एक चुनौती की तरह लिया और हर चुनौती को पार करते हुए आखिरकार बस्तर फाइटर्स में अपनी जगह बनाई।वह दिन सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व का दिन था,जब संजय ने वर्दी पहनी, तो मानो पूरे हाराडुला ने वर्दी पहन ली हो।
वर्दी पहनने के बाद भी संजय वही सरल, मुस्कुराते हुए और जमीन से जुड़े इंसान बने रहे। उनके अंदर न कोई घमंड था, न कोई दिखावा बस एक सच्चा जज्बा था, देश के लिए कुछ कर गुजरने का,लेकिन जिंदगी कभी-कभी सबसे खूबसूरत मोड़ पर सबसे कठिन इम्तिहान लेती है।
15 अप्रैल—एक ऐसा दिन, जो उनके जीवन में खुशियां लेकर आया था। उनकी सगाई हुई थी, घर में हंसी थी, उम्मीदें थीं, आने वाले कल के सुनहरे सपने थे। अगले साल जनवरी में उनकी शादी होने वाली थी। परिवार ने नए रिश्तों, नए रिश्तेदारों और नई खुशियो का स्वागत करने की तैयारी शुरू कर दी थी।
मां अपने बेटे की शादी के सपनों में खोई रहती थीं,पिता अपने बेटे को दूल्हे के रूप में देखने की कल्पना करते थे,और छोटा भाई उस दिन का इंतजार कर रहा था जब घर से बारात निकलेगी,लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
आज वही घर, जो कुछ दिन पहले तक खुशियों से भरा हुआ था, अब सन्नाटे में डूबा हुआ है। हंसी की जगह आंसुओं ने ले ली है, और सपनों की जगह एक गहरा खालीपन रह गया है।
संजय अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका नाम, उनका बलिदान और उनकी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी।
वे सिर्फ एक जवान नहीं थे,वे एक बेटे का कर्तव्य निभाने वाले, एक भाई का सहारा बनने वाले और पूरे गांव का गर्व थे। उनकी मुस्कान, उनकी सादगी और उनका साहस हर दिल में हमेशा जीवित रहेगा।
आज ग्राम हाराडुला में उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई,बाजार चौक के पास हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी,हर आंख नम थी,हर दिल भारी था,जब उन्हें अंतिम सलामी दी गई, तो पूरा माहौल गूंज उठा,”भारत माता की जय!“शहीद संजय गढ़वाले अमर रहें!”
यह सिर्फ नारे नहीं थे, यह उस सपूत के प्रति पूरे समाज का सम्मान और श्रद्धा थी, जिसने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की रक्षा की,अब उसी स्थान पर, जहां हजारों लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी, एक स्मारक बनाए जाने की बात सामने आ रही है। एक ऐसा स्मारक, जो आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाएगा कि इस मिट्टी ने एक ऐसा वीर जन्मा था, जिसने अपने देश के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया,संजय गढ़पाले भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कहानी कभी खत्म नहीं होगी,उनका जीवन हमें सिखाता है,कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना दूर नहीं होता।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र बीते 2 मई 2026 को दिन शनिवार को बेहद दुखद खबर सामने आई, जहां छोटेबेठिया थाना क्षेत्र, जो कांकेर–नारायणपुर जिले की सीमा पर स्थित संवेदनशील वन क्षेत्र है, वहां जिला पुलिस डीआरजी और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम को डी-माइनिंग, एरिया डॉमिनेशन एवं सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया था,दौरान टीम को जंगल के भीतर एक संदिग्ध IED मिला, जिसे मानक सुरक्षा प्रक्रिया के तहत निष्क्रिय करने का प्रयास किया जा रहा था। इसी दौरान अचानक विस्फोट हो गया। इस अप्रत्याशित धमाके की चपेट में आकर इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी ग्राम चिहका, बीजापुर, कांस्टेबल कृष्णा कोमरा ग्राम लोहत्तर कांकेर,कांस्टेबल संजय गढ़पाले ग्राम हराडूला,कांकेर और कांस्टेबल परमानंद कोर्राम ग्राम बरेठिन बाहरा कांकेर शहीद हो गए थे,शहीद जवानों का पार्थिव शरीर आज गृहग्राम पहुंचा जहां लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम बिदाई दी गई,इस दौरान लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा।
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