CG — बस्तर एक्सप्रेस की खबर का बड़ा असर: किलेपार पुलिया निर्माण में भ्रष्टाचार की होगी जांच, जिला पंचायत ने गठित की जांच समिति
डीएमएफ मद से बनी पुलिया की गुणवत्ता पर उठे सवाल, तीन दिन में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश


कांकेर 26 जुलाई 2026 :— जनपद पंचायत चारामा के ग्राम पंचायत किलेपार में नंदियापारा से टहांकापार मार्ग पर जिला खनिज संस्थान न्यास मद से निर्मित 3 मीटर आरसीसी पुलिया निर्माण में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण को लेकर बस्तर एक्सप्रेस द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित खबर का असर देखने को मिला है। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत उत्तर बस्तर कांकेर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने दो सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है।
गौरतलब है कि इस निर्माण कार्य में अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जिला पंचायत सदस्य तेजेश्वरी गब्बर सिन्हा तथा जनपद पंचायत सदस्य रेणुका सिन्हा ने सबसे पहले आवाज उठाई थी। दोनों जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करते हुए इसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद बस्तर एक्सप्रेस ने मामले को प्रमुखता से प्रकाशित कर प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया।
जिला पंचायत द्वारा जारी आदेश के अनुसार वर्ष 2024-25 में डीएमएफ मद से स्वीकृत इस पुलिया निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता, निर्माण मानकों तथा वर्तमान स्थिति की जांच कराई जाएगी। जांच समिति में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग कांकेर के कार्यपालन अभियंता डिकेश कुमार कोमा तथा जिला पंचायत कांकेर के प्रभारी सहायक परियोजना अधिकारी संतलाल गोटा को शामिल किया गया है।
आदेश में उल्लेख किया गया है कि समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के आधार पर यह जांच की जाएगी कि निर्माण कार्य तकनीकी मापदंडों के अनुरूप एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया गया है या नहीं। जांच समिति को स्थल निरीक्षण कर तीन दिवस के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट जिला पंचायत कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
बस्तर एक्सप्रेस ने अपनी पूर्व खबर में पुलिया निर्माण में कथित भ्रष्टाचार, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। खबर प्रकाशित होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अब प्रशासन द्वारा जांच समिति गठित किए जाने से यह उम्मीद जगी है कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की जांच जरूरी है, ताकि भविष्य में विकास कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार की पुनरावृत्ति न हो।


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