CG— भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण, नल-जल योजना बंद, 40 परिवारों के सामने जल संकट गहराया
CG— भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण, नल-जल योजना बंद, 40 परिवारों के सामने जल संकट गहराया



कांकेर/चारामा 30 मई 2026:-एक ओर जहां भीषण गर्मी लोगों का जीना मुश्किल कर रही है, वहीं कांकेर जिले के चारामा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम कोरटरा के आश्रित ग्राम जामबहार में पेयजल संकट ने ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। गांव के करीब 40 परिवार पिछले कई महीनों से पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को पीने, नहाने, खाना बनाने और पशुओं को पानी पिलाने तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में स्थित अधिकांश हैंडपंप और बोरवेल खराब हो चुके हैं। जो एकमात्र बोरवेल चालू है, उसमें भी केवल 10 मिनट तक पानी आता है और फिर लगभग एक घंटे तक पानी का इंतजार करना पड़ता है। पानी भरने के लिए महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है।
फरवरी से बंद है नल-जल योजना:- ग्रामीणों ने बताया कि गांव में जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई नल-जल योजना भी पिछले फरवरी 2026 से बंद पड़ी हुई है। योजना के तहत बने बिजली लाइन कनेक्शन के दो हिस्सों में कट जाने के कारण पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। इसकी जानकारी कई बार ग्राम पंचायत, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक मरम्मत नहीं कराई गई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिजली लाइन की मरम्मत समय पर कर दी जाती तो आज गांव को इस भीषण जल संकट का सामना नहीं करना पड़ता। विभागीय उदासीनता का खामियाजा सीधे ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
सामूहिक चंदे से चालू कराया बोरवेल :-गांव में पानी की समस्या इतनी गंभीर हो गई कि ग्रामीणों ने स्वयं पहल करते हुए सामूहिक रूप से राशि एकत्रित कर तीन वर्षों से बंद पड़े एक बोरवेल को मरम्मत कर चालू कराया। लेकिन यह राहत भी अधूरी साबित हुई। बोरवेल से केवल 10 मिनट तक पानी निकलता है, जिसके बाद लोगों को फिर लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।सुबह से ही ग्रामीण अपने-अपने बर्तन और डिब्बे लेकर बोरवेल के पास पहुंच जाते हैं। कई बार लोगों की बारी आने से पहले ही पानी बंद हो जाता है और उन्हें खाली बर्तन लेकर वापस लौटना पड़ता है।
दूसरे गांवों से पानी लाने को मजबूर ग्रामीण:-जल संकट की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि जाम बहार के लोगों को अब दूसरे गांवों पर निर्भर होना पड़ रहा है। ग्रामीण कई किलोमीटर दूर स्थित गांवों से पानी लाकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। इससे महिलाओं और बच्चों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि घरों में खाना बनाना, बर्तन साफ करना और कपड़े धोना तक मुश्किल हो गया है। वहीं पशुओं को पर्याप्त पानी नहीं मिलने से पशुपालकों की चिंता भी बढ़ती जा रही है।
बुजुर्गों को दी जाती है नहाने की प्राथमिकता:-ग्राम कोरतरा के पूर्व सरपंच धंसाया सेवता ने बताया कि गांव में पिछले दो महीनों से पेयजल संकट चरम पर है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण नहाने के लिए दूसरे गांवों के तालाबों पर निर्भर हैं, लेकिन भीषण गर्मी के कारण अधिकांश तालाब भी सूख चुके हैं।
उन्होंने बताया कि पानी की कमी के कारण गांव में बुजुर्गों को प्राथमिकता देकर नहाने के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। पशुओं के लिए भी पानी की भारी समस्या बनी हुई है। कई बार जनप्रतिनिधियों से पानी टैंकर भेजने की मांग की गई, लेकिन अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
घरेलू कामकाज भी हुआ प्रभावित:-ग्राम पंचायत की पंच निर्मला ने बताया कि पानी की कमी के कारण महिलाओं को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि घरेलू कार्य करना बेहद मुश्किल हो गया है। गंदे बर्तन साफ करने के लिए लगभग एक किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
निर्मला के अनुसार, घर में खाना बनाना, साफ-सफाई करना और बच्चों की देखभाल करना भी पानी के अभाव में चुनौती बन गया है। कई बार दिनभर पानी की तलाश में ही समय निकल जाता है।
पानी के लिए लगानी पड़ रही लंबी कतार:-गांव का दृश्य किसी राहत शिविर जैसा नजर आता है। ग्रामीण अपने-अपने बर्तन, बाल्टी और ड्रम लेकर घंटों लाइन में खड़े रहते हैं। पानी आने की उम्मीद में लोग अपनी बारी का इंतजार करते हैं, लेकिन कई बार पानी बीच में ही बंद हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल:-भीषण गर्मी के बीच एक पूरे गांव का पेयजल संकट से जूझना प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते खराब बोरवेल, हैंडपंप और नल-जल योजना को दुरुस्त कर दिया जाता तो आज हालात इतने गंभीर नहीं होते।

अब गांव के लोग प्रशासन से तत्काल पानी टैंकर की व्यवस्था, खराब पाइपलाइन की मरम्मत, बंद पड़े हैंडपंपों की सुधार कार्यवाही तथा स्थायी पेयजल व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
सवाल यही है कि आखिर 40 परिवारों की इस गंभीर जल समस्या का समाधान कब होगा और कब तक ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करते रहेंगे?
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