कोसागोंदी पंचायत में वित्तीय गड़बड़ी का आरोप, निजी खातों में पहुंची सरकारी राशि


गुरूर/बालोद। आर्यन साहू। बालोद जिले के गुरुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत कोसागोंदी में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। पंचायत में मूलभूत विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपए की राशि के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। इस मामले में सरपंच, उपसरपंच और पंचायत से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सवालों के घेरे में है।
फर्जी भुगतान का आरोप
जानकारी के अनुसार पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर की गई। आरोप है कि कई भुगतान बिना स्पष्ट कार्य और उचित दस्तावेजों के किए गए।
उपसरपंच ने लौटाई राशि
उपसरपंच लुप्रभा साहू के खाते में भी राशि आने की बात सामने आई है। उपसरपंच के अनुसार उक्त राशि बाद में सरपंच को वापस कर दी गई।
कार्यों में भारी असंगति
उपसरपंच का कहना है कि पंचायत में केवल छोटे-मोटे कार्य ही किए गए, जिनमें—
साफ-सफाई
पौधारोपण
सीसीटीवी कैमरे लगाना
जैसे कार्य शामिल हैं।
इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद पंचायत में कोई बड़ा विकास कार्य नजर नहीं आ रहा है।
पंचायत सचिव का बयान
पूरे मामले में पंचायत सचिव ने कहा है कि जिन लोगों के खातों के माध्यम से राशि हस्तांतरित की गई है, उनसे वह राशि वापस ली जाएगी।
हालांकि अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इतनी गंभीर वित्तीय अनियमितता को केवल राशि वसूली कर लीपापोती करते हुए दबाने की कोशिश की जाएगी, या फिर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी होगी।
सरपंच का पक्ष
सरपंच तुलसी साहू ने गली मरम्मत, कचरा सफाई और पौधारोपण जैसे कार्यों का हवाला दिया। खातों में राशि ट्रांसफर होने पर उन्होंने कहा कि काम के दौरान लिए गए कर्ज को चुकाने के लिए पैसे दिए गए थे।
जानकारी का अभाव
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरपंच को पिछले एक वर्ष में पंचायत में हुए कार्यों की स्पष्ट जानकारी तक नहीं है।
सवालों के घेरे में पंचायत
बिना स्पष्ट कार्यों के लाखों रुपए कैसे खर्च हुए?
निजी खातों में राशि ट्रांसफर क्यों की गई?
क्या यह सुनियोजित भ्रष्टाचार का मामला है?
क्या केवल राशि वापसी से पूरे मामले पर पर्दा डाल दिया जाएगा?
कोसागोंदी पंचायत का यह मामला ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है, ताकि जनहित की राशि का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
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