पहली ही बारिश में बह गया 19 लाख का रिटर्निंग वॉल! घोटिया में निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल, ग्रामीणों ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप; प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
4 फीट नींव की जगह 2 फीट खुदाई का आरोप, घटिया सामग्री और नाले की रेत से निर्माण का दावा; तकनीकी सहायक ने कहा- एस्टीमेट के अनुसार हुआ काम


बालोद, 07 अगस्त 2026। जगन्नाथ साहू – बालोद। जिले के डौंडी विकासखंड मुख्यालय अंतर्गत ग्राम पंचायत घोटिया में करीब 19 लाख रुपये की लागत से निर्मित रिटर्निंग वॉल पहली ही बारिश की मार नहीं झेल सका। खेखड़ी नाला के किनारे मैदान को मिट्टी कटाव से बचाने के उद्देश्य से बनाया गया यह तटबंध बारिश के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और उन्होंने निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता एवं भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि ठेकेदार ने लागत कम करने के उद्देश्य से निर्माण में उसी नाले की गुणवत्ताहीन रेत का उपयोग किया, जो इस प्रकार के निर्माण कार्य के लिए उपयुक्त नहीं थी। इसके साथ ही निर्धारित तकनीकी मानकों का भी पालन नहीं किया गया, जिसके कारण पहली ही बारिश में रिटर्निंग वॉल धराशायी हो गया और लाखों रुपये की सरकारी राशि पर सवाल खड़े हो गए।
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत को निर्माण एजेंसी बनाया गया था, लेकिन कार्य ठेकेदार के माध्यम से कराया गया। आरोप है कि ठेकेदार ने मनमाने तरीके से निर्माण कर गुणवत्ता से समझौता किया। यही वजह रही कि जिस तटबंध का उद्देश्य मैदान को नदी के कटाव से सुरक्षित रखना था, वही पहली बारिश में टूट गया और ग्रामीणों की उम्मीदें भी उसके साथ बिखर गईं।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि स्वीकृत एस्टीमेट के अनुसार रिटर्निंग वॉल की 4 फीट गहरी नींव बनाई जानी थी, लेकिन मौके पर केवल करीब 2 फीट गहरी नींव ही डाली गई। उनका कहना है कि यदि निर्माण तकनीकी मानकों के अनुरूप होता तो पहली ही बारिश में इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
हालांकि, इस पूरे मामले में तकनीकी सहायक देवेंद्र कुमार भूआर्य ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि निर्माण कार्य स्वीकृत एस्टीमेट और निर्धारित मानकों के अनुसार ही कराया गया है।
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य में यदि अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जनप्रतिनिधियों, ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए तथा शेष भुगतान पर तत्काल रोक लगाई जाए।
इधर, अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक ने कहा कि पहली ही बारिश में रिटर्निंग वॉल के क्षतिग्रस्त होने के मामले को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद विशेषज्ञों की टीम गठित की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, 19 लाख रुपये की लागत से बने रिटर्निंग वॉल का पहली ही बारिश में टूट जाना निर्माण गुणवत्ता और सरकारी कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, निर्माण में अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
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