CG — भालू के खौफ में स्कूल पर ताला, सुरक्षा की मांग को लेकर धरने पर बैठे ग्रामीण, कलेक्टर और विधायक को मौके पर बुलाने की मांग


कांकेर 7 अगस्त 2026 मरकाटोला गांव में दो दिन पहले मादा भालू के हमले में दो ग्रामीणों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है। शुक्रवार को ग्रामीणों ने गांव के हायर सेकेंडरी स्कूल में तालाबंदी कर दी और स्कूल परिसर के पास धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते, तब तक स्कूल नहीं खुलने दिया जाएगा और बच्चे भी पढ़ाई के लिए स्कूल नहीं जाएंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव से लगी पहाड़ी में बड़ी संख्या में भालुओं का बसेरा है। यही पहाड़ी स्कूल से सटी हुई है, जबकि स्कूल के चारों ओर बाउंड्रीवाल नहीं है। रोजाना इसी रास्ते से सैकड़ों छात्र-छात्राएं स्कूल आते-जाते हैं। इसके अलावा ग्रामीण भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं, जिससे हर समय भालू के हमले का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने बताया कि दो दिन पहले मादा भालू के हमले में गांव के दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हुई। घटना के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हुई है। बीती रात कई भालू गांव में घुस आए और घरों के आसपास घूमते रहे। इतना ही नहीं, जिन दो ग्रामीणों का अंतिम संस्कार किया जा रहा था, उस दौरान भी आसपास दो भालू घूमते दिखाई दिए। इससे ग्रामीणों में भय और बढ़ गया है।
धरने पर बैठे ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि स्कूल परिसर में तत्काल मजबूत बाउंड्रीवाल बनाई जाए। साथ ही पूरी पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की जाए ताकि भालू गांव और स्कूल की ओर न आ सकें। ग्रामीणों ने क्षेत्र में मौजूद सभी भालुओं का रेस्क्यू कर उन्हें घने जंगल में छोड़े जाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक बच्चों की जान खतरे में रहेगी।
धरने की सूचना मिलने पर नरहरपुर तहसीलदार मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को बताया कि स्कूल की बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए 25 लाख रुपये स्वीकृत कर दिए गए हैं और जल्द निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
हालांकि, इस आश्वासन के बाद भी ग्रामीण धरना समाप्त करने को तैयार नहीं हुए। उनका कहना है कि जब तक जिला कलेक्टर और स्थानीय विधायक आशाराम नेताम स्वयं मौके पर नहीं पहुंचते और उनकी सभी मांगों पर स्पष्ट व ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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