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धरती आबा बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर गोंडवाना समाज ने श्रद्धांजलि अर्पित की, ‘वनवासी’ शब्द के विरोध में राष्ट्रपति सहित जनप्रतिनिधियों के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

गोंडवाना समाज ने कहा – संविधान सम्मत ‘आदिवासी’ शब्द का ही हो उपयोग, समाज की पहचान और सम्मान की रक्षा की उठाई मांग

 

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चारामा 9 जून 2026:— धरती आबा और महान आदिवासी जननायक बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर गोंडवाना समाज समन्वय समिति ब्लॉक चारामा एवं सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर नमन किया। इस दौरान समाज के लोगों ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके संघर्षों तथा आदिवासी समाज के लिए किए गए योगदान को याद किया।

कार्यक्रम की शुरुआत जंगो रायतार इंग्लिश मीडियम स्कूल में श्रद्धांजलि सभा से हुई। इसके बाद समाज के पदाधिकारी दरगाहन चौक स्थित बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थल पहुंचे और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आदिवासी समाज को संगठित किया तथा अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए समाज को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया। मात्र 25 वर्ष की आयु में 9 जून 1900 को रांची जेल में उनका निधन हो गया, लेकिन उनका संघर्ष और विचार आज भी समाज को प्रेरित कर रहे हैं।

इस अवसर पर गोंडवाना समाज ने एक महत्वपूर्ण विषय को लेकर राष्ट्रपति, राज्यपाल, बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद तथा बस्तर संभाग के सभी विधायकों के नाम ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में समाज ने हाल ही में जगदलपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासी समाज के लिए प्रयोग किए गए “वनवासी” शब्द पर आपत्ति जताई है।

 

समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि आदिवासी समुदाय भारत के मूलनिवासी समुदायों में से एक है, जिसकी अपनी अलग संस्कृति, परंपरा, भाषा और इतिहास है। भारतीय संविधान में भी उन्हें अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता प्राप्त है। ऐसे में “वनवासी” शब्द उनकी ऐतिहासिक और संवैधानिक पहचान का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता। समाज स्वयं को “आदिवासी” कहलाना ही अपनी पहचान और सम्मान के अनुरूप मानता है।

ज्ञापन के माध्यम से समाज ने मांग की है कि आदिवासी समाज के लिए “वनवासी” शब्द के प्रयोग पर उचित संज्ञान लिया जाए तथा संविधान सम्मत “आदिवासी” और “अनुसूचित जनजाति” शब्दों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार के सभी विभागों, संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों को इसी शब्दावली के प्रयोग के लिए निर्देशित किया जाए।

समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी बात रख रहे हैं तथा आदिवासी समाज की भावनाओं और संवैधानिक अधिकारों के सम्मान की अपेक्षा करते हैं।

इस अवसर पर गोंडवाना समाज समन्वय समिति के कार्यकारी अध्यक्ष हीरा सिंह कोला, परगना मांझी श्रवण दर्रो, उपाध्यक्ष घनश्याम जुर्री, सलाहकार प्रभु पोया, सचिव चंद्रशेखर कोमरा, सर्व आदिवासी समाज अध्यक्ष गौतम कुंजाम, युवा प्रभाग अध्यक्ष असवन कुंजाम, सुरेंद्र जुर्री, गंगाराम जुर्री, देवप्रसाद जुर्री, हेमलाल जुर्री, भुनेश्वर कुंजाम, चंद्रभान जुर्री, प्रदीप नेताम, जगमोहन दर्रो, कविता नेताम, रामकुमारी कोर्राम, प्रिया नेताम सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।

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