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CG — रेत परिवहन से बढ़ा खतरा, महानदी अरौद घाट पुल जर्जर, ग्रामीणों में दहशत

कांकेर/चारामा 19 जनवरी 2026:- कांकेर जिले के चारामा विकासखंड अंतर्गत महानदी पर बना अरौद घाट पुल इन दिनों ग्रामीणों के लिए खतरे का कारण बनता जा रहा है। पुल की हालत लगातार खराब होती जा रही है। पुल के सामने वाले हिस्से का स्लैब टूट चुका है, जिसमें से सरिया बाहर निकल आया है। वहीं आगे का हिस्सा भी धीरे-धीरे धंसता नजर आ रहा है। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस स्थिति के पीछे मुख्य वजह रेत का लगातार परिवहन है। क्षेत्र में वैध और अवैध दोनों तरह से रेत उत्खनन हो रहा है, जिससे ओवरलोड हाईवा और भारी ट्रक दिन-रात पुल से गुजर रहे हैं। क्षमता से अधिक वजन के कारण पुल पर लगातार दबाव पड़ रहा है, जिससे उसकी मजबूती कमजोर हो गई है।

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ग्रामीणों ने बताया कि हाराडुला गांव को जोड़ने वाला पुल पहले ही दरार और धंसने के कारण करीब एक साल से बंद पड़ा है। इसके चलते लोगों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। अब अरौद घाट पुल की हालत भी उसी तरह बनती जा रही है। लोगों को डर है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह पुल भी कभी भी टूट सकता है।

महानदी पर बना अरौद घाट पुल क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस पुल के जरिए दो दर्जन से अधिक गांव ब्लॉक मुख्यालय चारामा और जिला मुख्यालय कांकेर से जुड़े हुए हैं। यदि पुल में कोई बड़ी तकनीकी खराबी आती है या हादसा होता है, तो आसपास के गांवों का संपर्क टूट सकता है और ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

मामले को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए पुल की तत्काल तकनीकी जांच कराने और आवश्यक मरम्मत व कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने ओवरलोड भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने और रेत खनन पर सख्ती से नियंत्रण करने की मांग की है।

इस संबंध में जनपद सदस्य चारामा चिंताराम साहू ने बताया कि क्षेत्र में लगातार रेत उत्खनन हो रहा है, जिसके कारण रोज भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। इससे गांवों को जोड़ने वाला पुल क्षतिग्रस्त हो रहा है।

वहीं ग्रामीण घासी राम पटेल ने कहा कि ज्यादा भारी गाड़ियां चलने से पुल कमजोर हो गया है। अगर यह पुल टूट गया, तो कई गांवों का संपर्क टूट जाएगा और अरौद पुल की हालत भी हाराडुला पुल जैसी हो जाएगी।

ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द भारी वाहनों का आवागमन रोका जाए और रेत खनन पर प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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