CG..धमतरी : खसरा त्रुटि और एग्रीस्टेक पंजीयन की समस्या से परेशान 4 गांव के सैकड़ों किसान पहुंचे SDM दफ्तर,जल्द निराकरण नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी…


धमतरी, 08 जून 2026। जिले के वनांचल क्षेत्र मटिया बाहरा, चंदन बाहरा, गहनासियार और भैंसामुड़ा के सैकड़ों किसान सोमवार को अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर नगरी एसडीएम कार्यालय पहुंचे। किसानों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए खसरा एवं रकबा संबंधी त्रुटियों का शीघ्र निराकरण करने तथा एग्रीस्टेक पोर्टल में नाम जोड़ने की मांग की।
किसानों ने आवेदन में बताया कि ग्राम भैंसामुड़ा और मटिया बाहरा में कई किसानों के रकबा एवं खसरा रिकॉर्ड में गड़बड़ी है। कई किसानों की काबिज भूमि को शासकीय भूमि के रूप में दर्ज किया जा रहा है। इसके चलते उनका एग्रीस्टेक पंजीयन नहीं हो पा रहा है, जिससे उन्हें जिला सहकारी समिति फरसियां से खाद, बीज और कृषि ऋण की सुविधा नहीं मिल रही है। किसानों ने खसरा एवं रकबा रिकॉर्ड में सुधार कर उन्हें एग्रीस्टेक से जोड़ने की मांग की है।
वहीं वनग्राम गहनासियार के किसानों ने भी ज्ञापन सौंपकर बताया कि गांव के करीब 62 किसानों को शासन द्वारा वन पट्टों के आधार पर संशोधित नए खसरे आवंटित किए गए हैं। हालांकि नए खसरे के आधार पर न तो बी-1 दस्तावेज निकल पा रहा है और न ही एग्रीस्टेक पंजीयन हो रहा है। इसके कारण किसानों को खरीफ सीजन के लिए सोसायटी से खाद और ऋण उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। किसानों ने प्रशासन से इस समस्या का शीघ्र समाधान करने की मांग की है।
मामले पर नगरी एसडीएम ने बताया कि जिन वनग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित किया गया है, वहां नए खसरों के राजस्व रिकॉर्ड में अपडेट नहीं होने के कारण ऐसी समस्याएं सामने आ रही हैं। प्रशासन द्वारा रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही किसानों की समस्याओं का समाधान कर लिया जाएगा।
किसानों का कहना है कि प्रशासन की ओर से दो से तीन दिनों के भीतर समस्या के निराकरण का आश्वासन दिया गया है। यदि निर्धारित समय में उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो जिले के 140 वनग्रामों के ग्रामीण उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान चारों गांवों के किसान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी खसरा रिकॉर्ड में त्रुटियों के कारण कई किसानों का एग्रीस्टेक पंजीयन नहीं हो पाया था, जिससे उन्हें धान बिक्री में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। हालांकि कुछ स्थानों पर वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी। यदि इस बार भी समस्या का समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो किसानों को आगामी खरीफ सीजन में खाद, बीज, ऋण और अन्य कृषि सुविधाओं के लिए गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।


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