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CG— सोशल मीडिया पोस्ट और वायरल ऑडियो से बढ़ा राजनीतिक घमासान, जनता पूछ रही— सड़क, बिजली, पानी और पंचायतों के मुद्दों पर कब होगी गंभीर चर्चा?

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कांकेर/चारामा, 24 मई 2026 :— कांकेर जिले के चारामा ब्लॉक की रेत खदानों को लेकर इन दिनों जिले की राजनीति पूरी तरह गरमाई हुई है। सोशल मीडिया में नेताओं के बीच चल रही बयानबाजी, वायरल पोस्ट और कथित ऑडियो ने राजनीतिक माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया है। लेकिन इन सबके बीच अब यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या जिले की राजनीति केवल रेत खदानों और आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित होकर रह गई है?

हाल ही में कांकेर सांसद भोजराज नाग द्वारा चारामा क्षेत्र के कुछ रेत खदानों पर कार्रवाई की गई थी। कार्रवाई के बाद यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया। हालांकि अब लोगों के बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि जब जिले के अन्य ब्लॉकों में भी लगातार अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की शिकायतें सामने आती रही हैं, तब वहां इस तरह की कार्रवाई क्यों दिखाई नहीं देती?

जिले के अंतागढ़, दुर्गूकोंदल, भानुप्रतापपुर और अन्य क्षेत्रों में भी लंबे समय से रेत खनन और परिवहन को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि वास्तव में गंभीर हैं तो कार्रवाई केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे जिले में समान रूप से होनी चाहिए।

इसी बीच सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेताओं के बीच चल रही अंदरूनी बयानबाजी ने भी राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ठाकुर राम कश्यप द्वारा साझा की गई पोस्ट में बेरोजगारी, पेसा एक्ट, आदिवासी अधिकार, डीएमएफ फंड और जनसमस्याओं को लेकर कई सवाल उठाए गए। पोस्ट में यह भी संकेत दिए गए कि राजनीति अब मूल मुद्दों से भटकती जा रही है।

वहीं दूसरी ओर एक भाजपा नेता और रेत कारोबार से जुड़े व्यक्ति के बीच कथित बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल ऑडियो में गाली-गलौज के साथ कुछ बड़े नेताओं के नामों का भी जिक्र होने की चर्चा है। हालांकि इस ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसे लेकर जिलेभर में चर्चाओं का दौर जारी है।

इन राजनीतिक विवादों के बीच अब आम जनता के मुद्दे भी चर्चा में आने लगे हैं। अंतागढ़ ब्लॉक में कई सरपंचों द्वारा सामूहिक इस्तीफे की बात सामने आ रही है। पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त राशि और संसाधन नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे गांवों में काम प्रभावित हो रहे हैं।

जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी समस्याएं बनी हुई हैं। कई गांवों में गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गहराया हुआ है, जबकि कुछ इलाकों में बिजली व्यवस्था भी बदहाल बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों को केवल विवादों और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से आगे बढ़कर इन मूलभूत समस्याओं पर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल अब डीएमएफ फंड को लेकर भी खड़ा हो रहा है। बताया जा रहा है कि पिछले लगभग छह महीनों से डीएमएफ फंड की बैठक नहीं हुई है। ऐसे में ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर फंड की राशि को रोके रखने के पीछे कारण क्या है। ग्रामीणों का कहना है कि डीएमएफ फंड से शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि यदि समय पर फंड जारी होता और बैठकें नियमित होतीं तो गांवों में कई विकास कार्यों को गति मिल सकती थी,, आखिर कब तक डीएमएफ फंड की राशि जारी की जाएगी ?

बताया जा रहा है कि जिस तरह सोशल मीडिया पोस्ट, वायरल ऑडियो और नेताओं की बयानबाजी सुर्खियों में है, उससे यह साफ दिखाई देता है कि जिले की राजनीति अब अंदरूनी खींचतान और शक्ति प्रदर्शन की ओर बढ़ती जा रही है। लेकिन जनता की नजर अब इस बात पर टिकी हुई है कि उनके रोजमर्रा के मुद्दों— सड़क, पानी, बिजली, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पंचायत व्यवस्था— पर आखिर कब ठोस पहल होगी।

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