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देव खुटा उखाड़े जाने से भड़का आदिवासी समाज, जैसाकर्रा में दंतेश्वरी माई के धार्मिक प्रतीक को हटाने पर FIR की मांग

चारामा, 15 मार्च 2026। थाना क्षेत्र के ग्राम जैसाकर्रा में हल्बा आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीकों को हटाए जाने का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस थाना चारामा पहुंचकर लिखित आवेदन सौंपा है और वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस घटना के बाद गांव सहित आसपास के क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बताया जा रहा है।

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हल्बा आदिवासी समाज और सर्व आदिवासी समाज की ओर से दी गई शिकायत में कहा गया है कि ग्राम जैसाकर्रा पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां आदिवासी समुदाय को जल, जंगल और जमीन पर परंपरागत अधिकार प्राप्त हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव में पूर्व से स्थापित दंतेश्वरी माई का प्रतीक स्थल (देव खुटा) एवं ध्वज खंभा उनकी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक परंपराओं का केंद्र रहा है। यहां वर्षों से पूजा-पाठ, अनुष्ठान और सामुदायिक पर्व आयोजित होते रहे हैं।

 

आरोप है कि 8 फरवरी 2026 को वन विभाग चारामा के अधिकारियों और कर्मचारी जिनमें भूमिका श्रीमाली, वन परिक्षेत्र अधिकारी। सत्येंद्र कश्यप, डिष्टी रेंजर। महेश सलाम, डिप्टी रेंजर। जयलाल सलाम, वनपाल। प्रभा देवदास वन रक्षक द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना तथा ग्राम सभा की अनुमति के उक्त धार्मिक प्रतीकों को जबरन उखाड़कर फेंक दिया। समाज ने इस कार्रवाई को मनमाना और अवैध बताते हुए कहा कि इससे उनकी धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है तथा पूरे समुदाय में आक्रोश व्याप्त है।

 

शिकायत में कहा गया है कि यह कृत्य न केवल धार्मिक अपमान है, बल्कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आदिवासी संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन है। समाज का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इससे क्षेत्र में सामाजिक तनाव और अशांति की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

 

हल्बा आदिवासी समाज और सर्व आदिवासी समाज ने प्रशासन से मांग की है कि घटना में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल FIR दर्ज की जाए, निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए तथा धार्मिक प्रतीकों की पुनर्स्थापना समाज की परंपरा और रीति-रिवाजों के अनुसार कराई जाए। इसके साथ ही जांच प्रक्रिया में समाज के प्रतिनिधियों को शामिल करने की भी मांग की गई है ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।

 

समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि 24 से 48 घंटे के भीतर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे चरणबद्ध और पूर्णतः शांतिपूर्ण आंदोलन करने को बाध्य होंगे। प्रस्तावित आंदोलन में धरना-प्रदर्शन, जुलूस तथा मुख्यमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपना शामिल हो सकता है।

 

समाज के प्रमुखों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि अपनी आस्था, संस्कृति और परंपरा का सम्मान तथा कानूनी दायरे में न्याय प्राप्त करना है।

 

थाना चारामा में ज्ञापन सौंपने के दौरान ठाकुर राम कश्यप, विजय ठाकुर, गौतम कुंजाम, श्याम सिंह तारम, देवराम ठाकुर, बलवीर नाईक, रामज्ञान चुरेंद्र, शंकर कुंजाम, रैनसिंह कांगे, श्रवण दर्रो, आनंद मंडावी, राजेंद्र पिद्दा, अमृत माहला, नम्मू नेताम, कैलाश हदगियां, रोहित नेताम, रामजी पिद्दा, इंद्रकुमार, मोहित भूआर्य, लिलेश्वर ठाकुर, राजा बढ़ाई सहित हल्बा आदिवासी समाज और सर्व आदिवासी समाज के अनेक लोग उपस्थित थे।

 

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सूर्या नेवेंद्र

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