ग्राम किलेपार पुल निर्माण में भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप: 16.18 लाख की लागत से बना पुल बना सवालों के घेरे में, बिना सरिया निर्माण, घटिया सामग्री उपयोग और अनियमितताओं को लेकर जनप्रतिनिधि यो में आक्रोश,मौके पर पहुंचकर की जांच की मांग,,
16.18 लाख रुपये की लागत से बने पुल में दिख रही खामियां, बिना सरिया निर्माण और घटिया सामग्री उपयोग करने का आरोप



कांकेर/चारामा 10 जून 2026:— चारामा विकासखंड के ग्राम किलेपार में लाखों रुपये की लागत से निर्मित पुल अब विवादों में घिर गया है। ग्रामीणों ने पुल निर्माण में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जनप्रतिनिधियों तथा निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 16 लाख 18 हजार रुपये की लागत से निर्मित इस पुल में शुरुआत से ही गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया, जिसके कारण निर्माण पूरा होने के बाद ही कई खामियां सामने आने लगी हैं।
ग्रामीणों के अनुसार पुल के कई हिस्सों में निर्माण कार्य बेहद निम्न स्तर का दिखाई दे रहा है। पुल की सतह और किनारों पर जगह-जगह गिट्टी की जालियां स्पष्ट रूप से नजर आ रही हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि निर्माण में सीमेंट का उपयोग निर्धारित मात्रा में नहीं किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण में घटिया गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसके कारण पुल की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पुल के निर्माण के दौरान कई तकनीकी नियमों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि पुल की नींव में सरिया का पर्याप्त उपयोग नहीं किया गया, जबकि ऐसे निर्माण कार्यों में मजबूत नींव के लिए सरिया आवश्यक माना जाता है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि पुल के कई हिस्सों में आज भी सीमेंट की बोरियां दिखाई दे रही हैं, जिनमें रेत भरा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन बोरियों का उपयोग नींव या आधार को भरने के लिए किया गया प्रतीत होता है। इसके अलावा निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी पुल के नीचे और किनारों पर प्लाई शटरिंग लगी हुई है, जिसे अब तक नहीं हटाया गया है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर और अधिक सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पुल का निर्माण मूल प्रस्तावित दिशा से अलग स्थान पर किया गया है, जिससे आवागमन में भी परेशानी हो रही है। पुल के समीप ही रेत खदान संचालित होने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में बरसात के दौरान नदी या नाले में पानी का तेज बहाव आने पर पुल की नींव कमजोर पड़ने और निर्माण को नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
यह पुल ग्राम किलेपार और टाहांकापार के ग्रामीणों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन है। इसी मार्ग से किसान अपनी कृषि उपज और अन्य सामान ट्रैक्टरों के माध्यम से लाते-ले जाते हैं। यदि पुल की गुणवत्ता वास्तव में कमजोर है, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने, दोषियों पर कार्रवाई करने तथा पुल की गुणवत्ता का परीक्षण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये की सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हुआ है, तो इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
क्षेत्र में पुल निर्माण में कथित भ्रष्टाचार की खबर मिलते ही जिला पंचायत सदस्य तेजेश्वरी गब्बर सिन्हा और जनपद पंचायत सदस्य रेणुका सिन्हा ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचीं और पुल का निरीक्षण किया।
जिला पंचायत सदस्य तेजेश्वरी गब्बर सिन्हा ने बताया कि ग्रामीणों से शिकायत मिलने के बाद वे मौके पर पहुंचीं। उन्होंने कहा कि पहली नजर में पुल निर्माण में अनियमितताएं दिखाई दे रही हैं। पूरी राशि आहरित की जा चुकी है, लेकिन स्थल का निरीक्षण करने पर ऐसा प्रतीत होता है कि पुल का कार्य अभी भी अधूरा है। कई स्थानों पर बोरियां लगी हुई हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं जनपद पंचायत सदस्य रेणुका सिन्हा ने आरोप लगाया कि पुल निर्माण में सीमेंट और सरिया का सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर दरारें दिखाई दे रही हैं। विशेष रूप से ढलाई के समय सरिया का उपयोग मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। साथ ही प्लाई का भी गलत उपयोग किया गया है। उन्होंने ग्राम सरपंच, ठेकेदार और इंजीनियर की मिलीभगत से भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया।
ग्राम के नागरिक होरीलाल यादव और जोहान ने बताया कि जब पुल का निर्माण किया जा रहा था, तब ग्राम के वरिष्ठ लोगों से कोई राय नहीं ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण में बेहद घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। उनका कहना है कि पुल के पिलरों में पर्याप्त रॉड नहीं डाली गई है तथा पुल का ऊपरी हिस्सा अभी से झुका हुआ दिखाई दे रहा है। ऐसे में यदि भारी वाहन गुजरते हैं तो पुल को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने मामले की जांच कराकर पुल का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।
जब इस संबंध में ग्राम की सरपंच मैना ध्रुव से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि उनके ग्राम में जो कार्य हुआ है, वह इंजीनियर और एसडीएम के मार्गदर्शन में कराया गया है। उन्होंने कहा कि वे समय-समय पर कार्यस्थल पर जाकर निर्माण कार्य का जायजा लेती रही हैं तथा ठेकेदार के संपर्क में भी थीं। ठेकेदार को आवश्यक निर्देश भी दिए जाते रहे हैं।
सरपंच ने आगे बताया कि यह कार्य पूर्व कार्यकाल का है, जो आचार संहिता के दौरान रुक गया था और वर्तमान कार्यकाल में पूर्ण हुआ है। उन्होंने कहा कि कार्य की पूरी राशि आहरित हो चुकी है। यदि कहीं कोई कमी या लापरवाही दिखाई देती है तो उसका सुधार तो नहीं। किया जा सकता लेकिन प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगे इस पर ध्यान दिया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग ग्रामीणों की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और पुल निर्माण में कथित अनियमितताओं की जांच कब तक कराते हैं।इस पर जिला पंचायत सीईओ कहा कि टीम भेज कर जांच करवाई जाएगी।
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