*CG – जिले के अन्तिम छोर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की खुली पोल! पूरी रात बोरई अस्पताल के सामने धरने पर बैठे ग्रामीण,जानिए क्या है पूरा मामला…*

धमतरी,16 फरवरी 2026। जिले के वनांचल क्षेत्र में अंतिम छोर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर ग्रामीणों का गुस्सा देखने को मिला है,दरअसल पूरा मामला बोरई क्षेत्र की है,जहां इलाके में हुए एक सड़क हादसे ने स्वास्थ्य विभाग की दावों की पोल खोलकर रख दी है, बताया जा रहा है कि बीते रात सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति गम्भीर रूप से घायल हो गया था,जिसे इलाज के लिए बोरई सिविल अस्पताल पहुंचाया गया,ग्रामीणों ने बताया कि इस दौरान अस्पताल बंद था इमरजेंसी ड्यूटी के लिए ना तो वहां कोई डॉक्टर था और ना ही कोई मेडिकल स्टॉफ,लिहाजा अक्रोशित ग्रामीण पूरी रात अस्पताल के सामने ही शव लेकर धरने पर बैठ गए, ग्रामीणों का ये भी आरोप है यदि वक्त रहते घायल युवक का उपचार होता तो,हो सकता है उसकी जान बच जाती है?।
जानकारी के मुताबिक घटना रविवार देर रात की की है,जहां बोरई-घुटकेल मार्ग में सड़क दुर्घटना का शिकार हुए युवक बाईक समेत घायल स्थिती में सड़क पर पड़ा हुआ था, बताया गया कि मामले की सूचना मिलते ही बोरई पुलिस और ग्रामीणों ने बिना देर किए मौके पर पहुंचे और युवक को बोरई हॉस्पिटल लेकर पहुंचे,लेकिन बताया जा रहा है कि वहां आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा ठप मिली,अस्पताल में न डॉक्टर मौजूद था,ना स्टॉफ नर्स और ना ही कोई कर्मचारी।
ऐसे में आक्रोशित ग्रामीणों ने अस्पताल के मुख्य द्वार में धरने पर बैठ गए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया,उनका कहना है कि यदि समय पर इलाज मिलता तो घायल की जान बच सकती थी, जिसे ग्रामीणों ने केवल लापरवाही नहीं,बल्कि प्रशासनिक असंवेदनशीलता करार दिया है, मामले में पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी ने कहा, “जब सिविल अस्पताल में ही डॉक्टर नहीं मिलेंगे तो आम जनता कहां जाएगी? क्या यहां इमरजेंसी सेवा सिर्फ कागजों में चलती है?” उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों को फोन पर सूचना दी गई, लेकिन मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लंबे समय से बनी हुई है,कई बार ज्ञापन और आंदोलन के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ,उनका कहना है कि जब तक अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती और जवाबदेही तय नहीं की जाती,आंदोलन जारी रहेगा,धरने में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण शामिल रहे, घटना के बाद पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसकी ठोस व्यवस्था की जाए।
गौरतलब है कि जिले अन्तिम छोर उड़ीसा और बस्तर सीमा से सटे बोरई क्षेत्र ये पहली बार नहीं है जब स्वास्थ्य व्यवस्था से नाराज ग्रामीणों ने प्रर्दशन किया हो,बल्कि इससे पहले भी वनांचल क्षेत्रवासी क्षेत्र की मूलभूत समस्या को लेकर मुख्य चौक में प्रर्दशन कर चुके है।
धमतरी,16 फरवरी 2026। जिले के वनांचल क्षेत्र में अंतिम छोर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर ग्रामीणों का गुस्सा देखने को मिला है,दरअसल पूरा मामला बोरई क्षेत्र की है,जहां इलाके में हुए एक सड़क हादसे ने स्वास्थ्य विभाग की दावों की पोल खोलकर रख दी है, बताया जा रहा है कि बीते रात सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति गम्भीर रूप से घायल हो गया था,जिसे इलाज के लिए बोरई सिविल अस्पताल पहुंचाया गया,ग्रामीणों ने बताया कि इस दौरान अस्पताल बंद था इमरजेंसी ड्यूटी के लिए ना तो वहां कोई डॉक्टर था और ना ही कोई मेडिकल स्टॉफ,लिहाजा अक्रोशित ग्रामीण पूरी रात अस्पताल के सामने ही शव लेकर धरने पर बैठ गए, ग्रामीणों का ये भी आरोप है यदि वक्त रहते घायल युवक का उपचार होता तो,हो सकता है उसकी जान बच जाती है?।
जानकारी के मुताबिक घटना रविवार देर रात की की है,जहां बोरई-घुटकेल मार्ग में सड़क दुर्घटना का शिकार हुए युवक बाईक समेत घायल स्थिती में सड़क पर पड़ा हुआ था, बताया गया कि मामले की सूचना मिलते ही बोरई पुलिस और ग्रामीणों ने बिना देर किए मौके पर पहुंचे और युवक को बोरई हॉस्पिटल लेकर पहुंचे,लेकिन बताया जा रहा है कि वहां आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा ठप मिली,अस्पताल में न डॉक्टर मौजूद था,ना स्टॉफ नर्स और ना ही कोई कर्मचारी।
ऐसे में आक्रोशित ग्रामीणों ने अस्पताल के मुख्य द्वार में धरने पर बैठ गए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया,उनका कहना है कि यदि समय पर इलाज मिलता तो घायल की जान बच सकती थी, जिसे ग्रामीणों ने केवल लापरवाही नहीं,बल्कि प्रशासनिक असंवेदनशीलता करार दिया है, मामले में पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी ने कहा, “जब सिविल अस्पताल में ही डॉक्टर नहीं मिलेंगे तो आम जनता कहां जाएगी? क्या यहां इमरजेंसी सेवा सिर्फ कागजों में चलती है?” उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों को फोन पर सूचना दी गई, लेकिन मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लंबे समय से बनी हुई है,कई बार ज्ञापन और आंदोलन के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ,उनका कहना है कि जब तक अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती और जवाबदेही तय नहीं की जाती,आंदोलन जारी रहेगा,धरने में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण शामिल रहे, घटना के बाद पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसकी ठोस व्यवस्था की जाए।
गौरतलब है कि जिले अन्तिम छोर उड़ीसा और बस्तर सीमा से सटे बोरई क्षेत्र ये पहली बार नहीं है जब स्वास्थ्य व्यवस्था से नाराज ग्रामीणों ने प्रर्दशन किया हो,बल्कि इससे पहले भी वनांचल क्षेत्रवासी क्षेत्र की मूलभूत समस्या को लेकर मुख्य चौक में प्रर्दशन कर चुके है।
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